भारत की इस जाबाज महिला ने जॉब छोड़कर कर दिया ऐसा कमाल कि बन गई विश्व रिकॉर्ड और पूरी दुनिया कर रही सलाम!

Posted On:07/2/22

हमारे इस बड़े से समाज में हमेशा ही एक से बढ़कर एक लोग मिलते ही रहते हैं। इसमें कोई कुछ अनोखा कारनामा कर देता है या फिर कोई किसी तरह के सफलता का मुकाम हासिल कर लेता है जिसे जानने के बाद समाज के अन्य लोग हैरान रह जाते हैं। इसी बात पर बड़े सयाने कहते हैं कि ‘अगर मान लो तो हार और ठान लो तो जीत’, इसका साफ़ और सीधा मतलब यही हुआ कि जब कभी भी सच्चे मन से ठान कर किसी काम में दिल्लोजां से जुटा जाए तो सफलता हर हाल में मिलती ही है। इस बात को खूब बखूबी तरीके से साबित भी किया है भारत के जाने माने अल्ट्रा रनर सूफिया खान ने।  बेशक ही जमाना बदल रहा है और आज समाज में महिलाएं हर काम और हर क्षेत्र में अपनी अच्छी धाक जमा रही हैं और कुछ मामलों में तो वो पुरुषों से भी आगे हैं और इस बात की एक सफल उदाहरण हैं, अल्ट्रा रनर सूफिया खान, जिन्होंने अभी हाल ही में विश्व प्रतिष्ठित ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में सफलता पूर्वक अपना नाम दर्ज करा कर इस बात को साबित कर दिया है कि आज के समय में महिलाएं किसी से भी कम नहीं है।

गौरतलब है कि ‘रन फॉर होप’ मुहिम के अंतर्गत दौड़ती भारत की यह जाबाज बेटी अब तक कई बड़े और सफल कीर्तिमान अपने नाम पर कर चुकी हैं। इस बारे में विशेष रूप से जानकारी के लिए आपको बता दें कि भारत की रनर सूफिया खान ने देश के चार महानगरों को जोड़ने वाले मशहूर ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ पर लगभग 6,002 किमी. की एक लम्बी दूरी पुरे 110 दिन, 23 घंटे और 24 मिनट का समय लेते हुए पूरी कर एक नया और बड़ा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के बारे और विस्तार से बता दें कि ‘स्वर्ण चतुर्भुज’ दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे भारत के चार महानगरों को जोड़ने वाले भारतीय राजमार्गों के नेटवर्क को कहा जाता है।

गौरतलब है कि सूफिया खान ने बीते 16 दिसंबर 2020 को राष्ट्रीय राजधानी (यानी दिल्ली शहर) से दौड़ना शुरु किया था, जो कि कुछ महीनों का समय लेते हुए 6 अप्रैल 2021 को समाप्त किया था। वर्तमान समय में 35 साल की इस महिला एथलीट ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक प्रयास से भारत के एक कठिन मार्ग ‘स्वर्ण चतुर्भुज’ को पूरा कर लिया है।

इस विषय में मीडिया से बात करते हुए सूफिया बताती हैं कि, उन्होंने अपने जीवन में कभी भी हार नहीं मानी, ना ही कभी हार के विषय में सोचा भी। अपने बातों में उन्होंने आगे बताया कि, ‘काफी कठिन और मशहूर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को बनाने के समय और अपने टास्क को कम्पलीट करते वक़्त मुझे कई तरह की ज्यादा चोटें आईं, लेकिन इन सब बातों के बावजूद भी मेरा पूरा का पूरा फोक्स काफी कम से कम समय में इस हज़ारों किमी की लम्बी दौड़ को पूरा करना था।’ इसके बाद सूफिया ये भी बताती हैं कि, इस मामले में उनके पति का भी उन्हें हमेशा ही सपोर्ट रहता था और इस दौरान वे उनकी हर एक छोटी से छोटी बातों का भी ख्याल रखते रहे। इसके अलावा उनके अच्छे पोषण से लेकर टास्क को पूरा करने के लिए फिजियोथेरेपी जैसे महत्वपूर्ण बातों का भी अच्छे तरह से ध्यान रखा। लगे हाथ आपको बता दें कि वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सूफिया के पति विकास उनके इस टास्क में एक सपोर्टर होने के साथ-साथ उनके फिटनेस ट्रेनर भी हैं।  इस सिलसिले में उन्हें ‘इंडियन गोल्डन क्वाड्रिलाट्रेल रोड पर चलने वाली सबसे तेज़ भारतीय महिला’ के रूप में प्रमाणित भी किया जा चूका है।

आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि बीते 27 मार्च 2022 को उन्हें जब इस विश्व रिकॉर्ड यानी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट मिला, तब जाकर दुनिया को सूफिया खान की इस महान उपलब्धि के बारे में पता चला था। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए साल 2017 में 35 साल की उम्र हो जाने पर सूफिया ने मैराथन दौड़ना शुरू की थीं और इसके ठीक दो साल बाद ही, उन्होंने अल्ट्रा-डिस्टेंस की भी रनिंग करनी शुरू कर दी थी।

अंत में अपने इंटरव्यू में सूफिया यह भी बताती हैं कि, ‘अल्ट्रा-डिस्टेंस रनिंग करना मेरा सबसे बड़ा जुनून है और मैंने अपने इस सपने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। उस दौरान मैंने अपनी अच्छी-ख़ासी नौकरी छोड़ने के बाद ही फुल-टाइम अल्ट्रा रनिंग करने का फैसला कर लिया था। चलते-चलते आपको बता दें कि इससे पहले भी लॉन्ग डिस्टेंस रनर सूफिया ने अपने ‘मिशन होप’ के लिए उत्तर में कश्मीर से लेकर साउथ के कन्याकुमारी तक की एक लम्बी दूरी दौड़कर भी पूरी की थी।