पृथ्वीराज की गौरव गाथा का कमजोर अध्याय, अक्षय कुमार की साख को एक और करारा झटका

Posted On:07/3/22

सम्राट पृथ्वीराज’ आखिरकार सिनेमाघरों में आ ही गया है । हिन्दी सिनामघरो  का क्रेज दुनिया भर में एक बहुत ही  आधुनिक कवित है , इसकी गवाही यहां अबू धाबी के उस सिनेमाघर से  मिली जहां पे  ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को देखने  के लिए अच्छे से अच्छे लोग जुटे हुए थे । इन लोगों ने  किसी ऐतिहासिक फिल्मो  या अक्षय कुमार की फिल्म या यशराज का  फिल्म देखने से ज्यादा क्रेज रहा है | और एक नई फिल्म को  देखने का स्वभाग प्राप्त हुआ। आम सिनेमा हरो में प्रेमी के लिए शुक्रवार को यही मायने  रखता हैं। उसके लिए हर शुक्रवार एक नई आशा प्राप्त हुआ है , और एक नई उम्मीद लेकर आ रहा है |

हम लोगो को उम्मीद रहती है कि कभी तो हिंदी सिनेमा  घरो में अपने सितारों के आभामंडल से  कभी तो बाहर निकलेगा। और कहानियो पर सही से काम करना का उम्मीद रखते है । कैमरे के सामने सही तरीके से काम या अभिनय न कर पाने पर सुपर सितारों को टोकेगा नहीं लेकिन , यहां फिल्मो में अब भी सिर्फ इसलिए बनाया जाता है|

कि अक्षय कुमार ने किसी  भी फिल्म के लिए हां कर देते है । एक कहानी, उस कहानी के अंतर्गत आया जाता है | हां करने वाला एक और सितारापाया जाता है  लेकिन एक ऐसा व्यक्ति है जो इन दोनों को साथ ला  सकता है , हिंदी सिनेमाघरो में किसी भी तरह के फिल्म को बना सकता है। ‘सम्राट पृथ्वीराज’ एक ऐसा ही एक फिल्म है जो । बॉक्स ऑफिस पर ‘बेल बॉटम’ और ‘बच्चन पांडे’ के बाद भी अक्षय कुमार की साख का इम्तिहान लेती एक और फिल्म को आगे बढाया जाता है |

रिंग मास्टर बनने से चुक गए चन्द्र प्रकाश 
अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर के अलावा  भी फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ की तीसरी कमजोर कड़ी  है जो इसका लेखन और निर्देशन दोनों एक ही है | चंद्र प्रकाश द्विवेदी का कहना था की जो इस फिल्म पर उन्होंने 15 साल रिसर्च किया हुआ  है। लेकिन, यह मेहनत को वह परदे पर उतार नहीं पाए रहे है । उनके फिल्मी कल्पनाओं से पानी और पाती इसकी कहानी को इसकी पाठ्यक्रम को कमजोर करने लगती है। और, अक्षय कुमार से वह ‘सम्राट पृथ्वीराज’ जैसा ही अभिनय भी नहीं कर पता है ।

और यहां ये बात भी जाहिर होती रहती है कि हिंदी फिल्मों के जो सुपर स्टार होते है उन लोगो को तो कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन  सुपर सितारों को  निर्देशित कर पाना आसान काम नहीं होता है  फिल्म में अक्षय कुमार भी कहते है की दृश्यों को निर्देशित काम चलाऊ तरीके से काम किया गया है इसलिए इसको सही कर दिया जाए |, और यही फिल्म के लिए नुकसानदेह साबित होने लगा है।

आदि और अंत तक उलझी रही कहानी 

फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ की कहानी पूरा ब्लाक बस्टर फिल्म हुआ था | और इसमे पूरा फिल्म दिखाया गया है। जो चंदबरदाई के लिखे महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ से  अलग है । ‘पृथ्वीराज रासो’ के बारे में कहा गया  है कि इसे चंदबरदाई ने वहा तक लिखा जहां तक इसमें पृथ्वीराज चौहान का यश गान हुआ है इसके बाद का हिस्सा  का पूरा उनके परिजनों ने पूरा किया हुआ है । और, इस अंत के बारे में बताया गया है की इसके लेखक, निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने पूरी छूट ले लिया था|  और अक्षय कुमार ने फिल्म की रिलीज से एक दिन पहले अपील किये थे की कि इसे देखने वाले फिल्म की जो इसमे अहम बातें है उसे लीक न करें क्योकि लिक करने पर पूरा फिल्म ख़राब हो जायेगा |

और ताकि दूसरों का ये फिल्म देखने का मजा किरकिरा ना हो जाये| लेकिन, फिल्म की शुरुआत और अंत में जो कुछ हुआ  है, वह चंदबरदाई के लिखने में मेल नहीं खाता है । कहानी शुरू होते ही पृथ्वीराज चौहान को बंदी के रूप में दिखाने जाता है और  उसके सामने पूरा  मौका है अपना  जान बचाने का, अगर वह मोहम्मद गोरी के सामने  अपना सिर झुका देते तो | इस मौके का पूरा फिल्मी  की तरह उपयोग किया जाता है । पृथ्वीराज  चौहान की जय जयकार करने के लिए दर्शकों को पूरा मौका भी मिल जाता है  लेकिन उससे पहले ही पूरा फिल्म की कहानी अतीत में चला जाता है | फिल्म पृथ्वीराज चौहान  पूरा एतिहासिक पे बनाया गया है |