Sunday, October 2, 2022
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अमरनाथ यात्रा से जुड़े राज – क्यू शेषनाग सरोवर पर भोलानाथ ने उतारा सांप

अमरनाथ यात्रा से जुड़े राज – क्यू शेषनाग सरोवर पर भोलानाथ ने उतारा सांप. हिंदू धर्म में अमरनाथ यात्रा का विशेष महत्व है। बाबा बर्फानी को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं। अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू हो गई है। और पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हो गया है।

अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अलग ही उत्साह है। दो साल बाद इस बार अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। यह हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। इस बीच महादेव बर्फ से बने शिवलिंग के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। अगर आप भी कर रहे हैं अमरनाथ यात्रा पर तो जानिए अमरनाथ से जुड़े ये राज।

कैसे बनता है बर्फ का शिवलिंग

मान्यता है कि बाबा बार्फानी एक मात्र ऐसा शिवलिंग है, जिसका निर्माण हर साल प्राकृतिक रूप से होता है और वह चंद्रमा की रोशनी के आधार पर घटता-बढ़ता है. बर्फ से बने इस शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से पानी की बूंदों के टपकने से होता है. यहां का तापमान और पानी के बूंदे इतनी ठंडी होती हैं कि नीचे गिरते ही वह बर्फ का आकार ले लेती है और धीरे-धीरे इसी बर्फ से तकरीबन 12 से 18 फीट ऊंचा शिवलिंग प्राकृतिक रूप से अपना आकार ले लेता है.

अमरनाथ यात्रा से जुड़े कुछ अनसुलझे रहस्य

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा में माता पार्वती को अमरता के मंत्र का पाठ किया था।

यहां स्थित शेषनाग सरोवर में भगवान शिव ने अपने गले में लगे सांपों को हटा दिया था।

भगवान शिव अमरनाथ यात्रा से 96 किमी दूर पहलगाम में रुके और विश्राम किया। यहां उन्होंने अपने बैल नंदी को छोड़ दिया।

अमरनाथ गुफा पूरी तरह कच्ची बर्फ से बनी है। लेकिन बाबा बर्फ की ठोस बर्फ से बने हैं। ठोस बर्फ से शिवलिंग कैसे बनता है यह आज भी एक रहस्य है।

अमरनाथ गुफा के रास्ते में भगवान शिव ने पंचतरानी पर पंचतत्वों का परित्याग कर दिया।

अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के पास बहता है पानी यह पानी कहां से आता है यह आज भी रहस्य बना हुआ है। साथ ही, यात्रा के दौरान तापमान इतना कम होने पर भी पानी जमता क्यों नहीं है।

किंवदंती के अनुसार, जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता का मंत्र सुनाया, तो भगवान शिव और माता पार्वती के अलावा कबूतरों का एक जोड़ा बैठा था। यह कथा सुनकर कबूतरों का जोड़ा अमर हो गया। यह जोड़ी आज भी अमरनाथ गुफा में देखी जा सकती है।

माना जाता है कि यह गुफा 5000 साल पुरानी है और तब से बनी हुई है। यहां के शिवलिंग को स्वभून के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इस शिवलिंग ने ही बनाया है।

अमरत्व से जुड़ी है अमरनाथ की कथा

बाबा अमरनाथ को शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है क्योंकि उनकी मान्यता है कि इसी स्थान पर कभी खुद देवों के देव महादेव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था.

मान्यता है कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरत्व का रहस्य जानने की इच्छा प्रकट की तो भगवान शिव उन्हें इसका राज बताने के लिए हिमालय पर्वत के इस एकांत क्षेत्र में लेकर आए, ताकि इसे कोई दूसरा न सुन सके, लेकिन जिस समय वे माता पार्वती को इसका रहस्य बता रहे थे, उसी समय जन्में शुक-शिशु ने सुना और शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हुए. मान्यता है कि बाबा अमरनाथ के धाम पर दिखाई पड़ने वाले कबूतर के जोड़े को भी अमरत्व का राज जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो आज तक वहां पर मौजूद हैं.

अमरनाथ यात्रा पर जाने वाला कोई शिव भक्त कबूतर के इस जोड़े को शिव के गण के रूप में तो कोई शिव-पार्वती के रूप में देखता है. मान्यता है जिन लोगों को कबूतर के जोड़े का दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है, उनकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है.

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